धोखा
झूठी.. एक उम्र गुज़ार दी ,
जो ना थी खबर.. वो छाप दी।
कहने को तो.. हम सब कुछ थे ,
पर फिर भी.. तेरी रजा जान ली।।एक आस में हम - रह गए ,
तेरा दर्द शायद - सह गए
आंखें खुली तो, ज्ञात आया ।
बस धोखा, ही हाथ आया ।।
झूठी.. एक उम्र गुज़ार दी ,
जो ना थी खबर.. वो छाप दी।
कहने को तो.. हम सब कुछ थे ,
पर फिर भी.. तेरी रजा जान ली।।एक आस में हम - रह गए ,
आंखें खुली तो, ज्ञात आया ।
बस धोखा, ही हाथ आया ।।
Nice 👍
जवाब देंहटाएंVary nice 👌👏
जवाब देंहटाएंati sunder pnktiya.....k
जवाब देंहटाएंTrue lines
जवाब देंहटाएं❤true
जवाब देंहटाएंThanks :)
जवाब देंहटाएंबहुत खूब लिखा है। आपकी पंक्तियों ने पुरानी यादें फिर ताजा कर दी।
जवाब देंहटाएंWow mousi nice poem
जवाब देंहटाएंआंखें खुली तो, ज्ञात आया ।
जवाब देंहटाएंबस धोखा, ही हाथ आया ।।