**ना होगी मुलाकात, poetry on trust break




है इतनी सी बात, फिर ना होगी मुलाकात

तेरे रास्ते नहीं मेरे रास्तों के साथ |

 

हैं तेरी अपनी ज़रूरते  बड़ी,

हूं शायद नहीं में उनमे कहीं |

 

एक दोस्ती भी तो निभ न सकी,

और क्या उम्मीद थी मेरी इससे बड़ी ||

                                  

टिप्पणियाँ

  1. बहुत खूब लिखा है आपने। कम शब्दों में बहुत ही सटीकता के साथ बहुत बड़ी बात कह दी है।

    सतीश।

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