Wednesday, November 26, 2025

तोतू My Lucky Parrot, परिंदो के लिए ही बना आसमान है










है एक कहानी तोतू की 

मेरे प्यारे से तोते की

मिला था अँधेरी रात में

फसा था किवाड़ की आड़ में

था बस महीने भर का सहमा हुआ

सोचा क्या करू अब इसका 

लपेटा दुप्पटे में फिर सहलाया

प्यार से उसको लकी तोतू  बुलाया

फिर रखा उसको एक जूते के डब्बे में

दिए दाने चने के प्याली  में 

हथेली से छोटा नन्हा सा परिंदा

कभी मारु सिटी कभी ताली बजाउ

फेरु ऊँगली उसपे लकी लकी दुहराऊ

दी दवाई उसको घायल मिला था 

चौबीस घंटे में एक बार बोलता था 

आदत मुझे उसकी होने लगी थी 

अकेली से दुकेली होने लगी थी 

तीन महीने में लकी ने उड़ना सीखा 

खिड़की दरवाजे पे चढ़ना सीखा 

मिल गया था खिलौना जैसे मुझे 

अब नहीं थी ज़रूरत किसी की मुझे 

दिन बीते उसकी बोली को सुनते 

रहता संग मेरे छुपता फुदकते 

लाल रंग का मुँह और पूरा हरा था 

छोटे से पंखो को प्यार से फेरता था 

गोद में लेके बैठी थी मक्के के दाने

बुलाया उसे वो लगा पंख फ़ैलाने 

देखते देखते छत पे  उड़ गया वो

बुलाया बहुत पर न लौटा कभी वो 

बहुत रोइ पछताई लकी लकी चिलायी

निरमोही ने न कोई सिटी बजाई 

हुए तीन माह उसे घर से गए 

न जाने क्यू ऑंखें उसकी राह तके

खाली है पिंजरा और सूनी अटारी 

बैठा होगा किसी अमुआ की डारी

उड़ने को मिला खुला आसमान है 

रहने को मिली हरे पत्तो की छाव है 

यही ज़िन्दगी उसकी अपना जहाँ है 

परिंदो के लिए ही बना आसमान है। । 

 







 









Monday, November 24, 2025

जंगल का राजा कौन, Children Story, Jungle's King, कोयल बुलबुल गोरैया भी कठफोड़वे के हित में बोले

आओ सुनते है एक कहानी

जंगल के राजा शेर की मनमानी 

आंखों है लाल और भोंहे है तानी

कौन है भालू और कौन है हाथी

सब पे हुकूमत अपनी ज़मानी

चूहे बिल्ली तीतर बटेर ये सब है दरबारी 

मंत्री लोमड़ी को बना दिया जिसने सबकी बुद्धि हरली

जानवरो  की चालाकी सब अपनी गठरी में भरली

चीता, बाघ ,सियार, ज़ेबरा दिनभर करते सलामी 

शोर मचाया कठफोड़वे ने अब राजा बनना मेरी बारी 

खोरड़ कर दूंगा सिंघासन जिसकी लकड़ी सबसे निराली 

गिलहरी कूद कूद चिलाये क्या है अपनी जान गवानी

बस एक दहाड़ होगी राजा की फिर तेरी  शामत आनी

कोयल , बुलबुल , गोरैया भी कठफोड़वे के हित में बोले 

सभी पक्षी मान गए बोले कठफोड़वे को राजा चुन ले

राजा बड़ा दिलवाला था मान गया वो सबकी बात 

आने वाले शनिवार को होगी ताज पहनने की रात

बन गया राजा कठफोड़वाऔर लगे सब पक्षी गाने 

पर एक दिन लाया शिकारी चुगने के लिए दाने 

सर्दी की थी  धूप और लगा चिडियो को फ़साने 

एक -एक कर सब पक्षी फस गए लगे रोने चिल्लाने 

बुलाने लगे कठफोड़वे को राजा राजा दोहराने 

वो था पर शिकार पहले से उसके निशाने 

घायल होकर  गिरा परिन्दा लगा शेर शेर चिल्लाने 

आते देख शेर को सब छोड़ वो भगा 

आज़ाद हुई सब चिड़िया कैद से अपनी मूर्खता को माना 

हाथ जोड़कर शेर से बोले बन जाओ हमारा राजा  

बल बुद्धि और उदारता के गुड को हमने पहचाना 

जंगल का राजा शेर बनेगा ये हम सबने ठाना ||




Friday, November 21, 2025

इस खुले आसमान के नीचे अब भी सुकून बाकी है, Passing Life,


बीत रही है सुख - दुख के किस्सों की जिंदगी

कह रही है बढ़ती उमर रुकजा ए जिंदगी


माना तजुरबे है बहुत फिर भी सीखना बाकी है

रिश्ते में लगी गांठो को अभी सुलझाना बाकी है


कुछ चेहरे धुंधले हो गए उन्हें आंखों में उतारना बाकी है

कुछ बातें अधूरी रह गईं उन्हें पूरा करना बाकी है


दिल पे बोझ है जो उसे उतारना बाकी है

अलिंगन करके बीते कल को फिर से जीना बाकी है


राह में दिखे मंजर को फिर से दोहराना बाकी है

लब पे ले आए मुस्कान जो वो लम्हा देखना बाकी है


छूट गया जो टूटा तारा उसे फिर  से देखना बाकी है

चांदनी रात में चांद के साथ चलना बाकी है


दिल में कल्पनाएं हैं बहुत उन्हें कागज़ पर उतारना बाकी है
लगता है इस खुले आसमान के नीचे अब भी सुकून बाकी है..





Sunday, November 16, 2025

रहु धरती माँ के संग, Village Life, Living With Nature


















जानते है एक गांव है

नदी किनारे बसा हुआ 

बांस ओर पाकड़ के 
                                                                                        
पेड़ से घिरा हुआ

प्राचीन मंदिर लाल कुआ

पहचान पुरानी लिए हुआ

आम के बाग महुआ के पेड़
                                                    
खेत खलियआन से सजा हुआ

सावन में बारिश का शोर 

पगडंडी पे नाचे मोर

ठंडी में छीमी की खेती

घर घर बनती घुघरी रोटी

गरमी में पके आम की दाल

संग सत्तू भौरी चोखा अचार

पतझड़ में है बेल का रस

चना चबैना गुड़ और चिवड़ा

चूल्हे पर है मोटी रोटी

उसकी तयारी शाम से होती

लकड़ी काटो ऊपरि लाओ

गोधूलि बाद रसोई लगाओ

नौ बजे लग गई है खटिया 

पांच बजे फिर उठना भैया 

की किसानी फसल लगी

घर की ऐसे बर्कत्त  हुई

गाए गोरू भी रहते घर में

सामान्य और खुशहाल जिंदगी

रहना चाहु गाँव मैं

बैठु किसी तरुवर की छाँव मैं

देखु जीवन के असली रंग

रहु धरती माँ के संग


Thursday, November 13, 2025

अम्बिया (आम का पेड़) दो जीवन किसी को बनो कारण ख़ुशी का लगाओ पेड़ ऐसा जो बने सहारा सभी का











फिर आई अमुआ के पेड़ पर बौर  

खटास अम्बिया की 

महक रही सड़क की ओर 

फैला हुआ है सरपत जैसे 

बना है खग  विहग का डेरा 

मिलती है राहगीरों को छाँव

मचता है कोलाहल सुभू शाम 

कीट पतंगे चींटे माटे 

वयस्त रहते घर इसमें बनाते 

बच्चों की  फौज रोज हल्ला मचाये 

अमुआ के तले चल घर एक बनाये 

पकड़म पकड़ाई या छुपम छुपाई

गिल्ली डंडा कभी चोर सिपाही

ना जाने क्या खेल है खेले

दादाजी आये सुबह  दातुन लेने 

है सबका सहारा आम का पेड़

सड़क  किनारे लगा है पेड़ 

रहे  इंतज़ार कोयल की कुहक का 

सुहाना हो मौसम तो गाना ख़ुशी का

लगे अबके आम तो निशाना उम्मीद का

किसी चिके से न टूटे शीशा किसी का

है सबके हिस्से में आये पांच आम 

खाना उसको नमक लगा के राधे शयाम

हो जाए मुश्किल टिकोरों  का पकना

जब हो हमला वानर दल का

बजाये ताली और शोर मचाये 

बच्चे बंदर आया चिल्लाये

चाचा की चाय इलाची महकाये 

पेड़ के बगल में मजमा लगाए 

रोज़ एक कहानी सुनाता आम के पेड़

है सबका अभिमान आम का पेड़ 

दो जीवन किसी को बनो कारण  ख़ुशी का

लगाओ पेड़ ऐसा जो बने सहारा सभी का ||











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