धोखा
झूठी.. एक उम्र गुज़ार दी , जो ना थी खबर.. वो छाप दी। कहने को तो.. हम सब कुछ थे , पर फिर भी.. तेरी रजा जान ली।। एक आस में हम - रह गए , तेरा दर्द शायद - सह गए आंखें खुली तो, ज्ञात आया । बस धोखा, ही हाथ आया ।।
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