निशब्द प्रेम : Silent Love | Hindi Poetry On Distance Relationship | Finding Ways In Love
निशब्द प्रेम बहुत दिनों से पूछा नहीं हाल क्या तू भी बेपरवाह हो गया प्यार की राह दिखा के मुझे खुद अपने पथ से गुमराह हो गया । सिखाया तो तुमने ही है दुनिया में बस प्यार ही है बांधे जो दिल से दिल को ऐसी कोई डोर भी है । है राह दिखाना आसान बहुत पर उसपे चलना मुश्किल है खोखले समाज की सोच बदलना न मुमकिन है फासले ही अच्छे है जो होके दूर भी पास है जो हो नहीं सकता यार मेरे क्यू उसपे तुझे विश्वास है । सच तो आखिर सच ही है हर राह की न मंज़िल है इस रंग बदलती दुनिया में निशब्द होना ही वाजिब है ।