जहाँ कोई नहीं वहां तू है प्रभु # ShivBhakti # Shiv Shakti
जहाँ कोई नहीं वहां तू है प्रभु हम सब में है जो जल रही वो तेरी ही तो लौ है प्रभु क्या बोलू कुछ कह न सकु तुम तो शब्दों की श्रृंखला हो प्रभु उठते बैठते सोते जागते लब पे रहता तेरा नाम प्रभु तेरा कोई स्वरुप नहीं फिर भी ख्याल आ जाता है बंद करू जो आँखें अपनी दर्शन तेरा हो जाता है मेरे अंदर भीतर बाहर गूंजता है तेरा नाम प्रभु रहु कहीं मैं भगवन , लेकिन तू रहता है मेरे साथ प्रभु ।।