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Showing posts from January, 2026

"ॐ शं शनैश्वराय नमः।। " ,जय शनिदेव, न कोई छोटा न बड़ा है, हर कोई पंक्ति में खड़ा है, शनिदेव की अदालत में हर कोई कटघड़े में खड़ा है

  " ॐ शं शनैश्वराय नमः।। "  नीलांजन समाभांस रविपुत्रं यमाग्रजमं  l छायामार्तंडसंम्भूतं तं नमामि शनेश्वरम l।  नील वर्ण और छोटा कंठ टेढ़ी दृष्टि भुकटी विकराल  नेत्र लाल और धीमी चाल  एकांत प्रिये और धैर्यवान   वैराग्य पसंद और  कर्म प्रधान विस्तृत पथ पे चलनेवाला पिंगल , कृष्णा छयानन्दन  शानिवार है वार इनका पुष्यआ ,अनुराधा  और उत्तरा भाद्रपदा नक्षत्र इनका मकर और कुम्भ के राशि स्वामी  श्री कृष्णा प्रभु के भक्त है रुद्रान्तका  टेढ़ी चाल को सीधी करदे और सीधी को टेढ़ी  वक्र दृष्टि गर पड गयी प्रभु की तो खुली किताब जातक की दशा इनकी अतयंत कष्ट दायक ढैया हो या साढ़े साती  तपा के तुझको सोना करदे  जीने का उदेशय बता दे  देश विदेश की सैर करादे पल में सोना  पीतल बना दे  बीमारी वैधा जान न पाए  ऐसा रोग लगा दे l न कोई छोटा न बड़ा है,  हर कोई पंक्ति में खड़ा है  शनिदेव की अदालत में   हर कोई कटघड़े में खड़ा है  न्याय के देवता न्याय ही करते आज नहीं तो कल कर्मो का फल देते जो बोया है वो काटना पड़े...

घटिया लोगों से पहचान नहीं , क्यूँ समझदारों की भीड़ में चर्चा है आपका, और कुछ नहीं है खोने को मेरे पास

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 प्त्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं  समझदार को इशारे की ज़रूरत नहीं  जल में रहकर मगर से बैर नहीं  और घटिया लोगों से पहचान  नहीं  भला करते करते  बुरा कर गए  रकीबो से मिलके दगा  कर  गए  गले लगा के प्यार से मुझको  मेरे सीने में खंजर उतारते चते गए  क्यूँ समझदारों की भीड़ में चर्चा है आपका जो  उड़ा रहा है मजाक  जमाना आपका  दिल से लिए है फैसले तो  बात मान लो जहाँ  दिल   लगे वहाँ  दिमाग  न लगाया करो और कुछ नहीं है खोने को मेरे पास  एक तुम  हो  और तुम्हीं हो जीने की  आस  ऐसे ही जिंदगी तेरी याद में बिताई  तकतें रहे चांद को सीने से फोटो लगाई  हर उम्मीद अपनी ना उम्मीद हो गई  जब चांद के ऊपर बदरी छा गई 

खाली जेब की थी अपनी रईसी अपना वक़्त था के नासमझी थी

अपना वक़्त  था के नासमझी थी  जिंदगी बहुत खूबसूरत थी  थे अपने गुमान में गुम  अलग ही दुनिया थी  बातों बातों में ताली  हसी ओर ठिठोली  दिनभर गुनगुनाना  दर्पण देख मुस्कुराना  वो किस्से कहानी  रोज महफिल सजानी  झूठ बोल के रोज दोस्तों से मिलना पैसे इकठ्ठे करके फिर मूवी देखना  बाद में लगे सब अपना पराया बताने  याद आते है वो गुजारे ज़माने  खाली जेब की थी अपनी रईसी  जोड के पैसे की खाइशे पूरी  ना मोबाइल ना कोई कैमरा  जिंदगी थी एक खूबसूरत आईना