बेज़ार | AN EMOTIONAL POETRY ON LIFE
बेज़ार क्या लिखा है तूने कभी पढ़ लिया होता , मुझे ज़िन्दगी देने से पहले तू भी इसे जी लिया होता एक एहसान मुझपे भी कर दिया होता कभी मेरे साथ आके तू भी रह लिया होता । समझते हम भी तुझको ऐ ...खुदा ! ये जीवन भी तूने अगर जी लिया होता । जब दूर तक कोई दिखाई नहीं देता , फिर तुझे भी अपनी किये पे पछतावा होता । बस एक जवाब देदे मेरे खुदा मुझे , तेरी ज़िन्दगी क्यों मुझको बेज़ार सी लगे ।