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Showing posts with the label कलयुग को भी सतयुग करते जो लेते है हरी का नाम KETU : The Giver # The Spiritual Planet Ketu

केतु : मुक्ति, प्यास, जिज्ञासा, सबकुछ और कुछनही #अपना ध्वजा फहराने वाला #देने वाला (केतु ) गृह #आध्यात्मिक गृह #Ketu

पलाश पुष्प शंका सम थार का ग्रह मस्तकम रौद्रंम रौद्रात्मकंम गौरंम,  तं केतुम प्रणमाम्यहम अष्टभुजाय  विदमहे सूलहस्ताय धीमहि तन्नो केतु प्रचोदयात।।  केतु : मुक्ति, प्यास, जिज्ञासा, सबकुछ और कुछनही ।।  आज़ादी का बादल हो या खयालो का धुआँ मौजूदगी है हर जगह पर ध्यान है कहा ? देने वाला (केतु ) गृह है जो , आध्यात्मिक गृह है वो अपना ध्वजा फहराने वाला देश विदेश घूमनेवाला  आंखों से जो देख न पाए ,  लालच अभिमान कभी न भाए सेवा भाव, ईश्वरीय भक्ति अध्यात्म जिसको अत्यंत भाए जड़ से जो है जुड़ा हुआ,  प्रकृति में समां हुआ  कुलदेवता और पित्तरो का आशीर्वाद लिया हुआ  जो अंतर्मन में झाँक न पाया,  चैन उसको कहीं न आया ज्ञात हुआ जब खुद का उसको तभी वो ज्ञानी कहलाया  घाट घाट का पानी पीला दे , पल में बुद्धि भ्रष्ट करादे क्रोध इतना प्रचंड के उम्र भर का पछतावा करादे देने पे आये तो सर्वस्व दे , नियत देख बरक्कत दे  सहज सरल मानव को  - केतु मुक्ति का मार्ग दे  छल कपट और द्वेष से दूर ,निश्छल ,निष्पक्ष और प्रेम भरपूर  प्रभु जिसके चित में बसे केतु महराज उ...