पतंग | हिंदी कविता | PATANG | Poem on Kite
पतंग ************************************************* बीती है जो तेरे संग जीये है बस वही पल यादें है उन्ही लम्हों की जब थी पतंग डोर के संग ! हर दिन एक नयी कहानी थी आस्मां से ऊपर पतंग उड़ानी थी थे आकाश में फैले हुए बस रंग प्यार के बिखरे हुए ! वो भी क्या रंगीन शाम थी डोर हाथ में और पतंग तेरे नाम की एक डर था मुझे कहीं पतंग न कट जाये डोर रहे बस हाथ मेरे और , तू आंखों से ओझल हो जाये !