ልጥፎች

ልጥፎችን ከመለያ आज भी दे रही अग्निपरीक्षा #आखिर समाज कौन ह....? # Society & Its Impact #Ayodhya #Dusshera ጋር በማሳየት ላይ

वो सीता पे ऊँगली उठाने लगे # Ramayan # Society & Its Impact #RamSita #Ram Ki Lilla

ምስል
      मेरे अपने मुझको परखने लगे  खुद अपना परिचय देने लगे  सबित ना कर सके मुझको जब  मेरे चारित्र पे ऊँगली उठाने लगे  तमाशा देखना है आदत जिनकी  वो किरदार मुझे समझने लगे  जात पात और ऊंच नीच  मुझे धरम अधर्म सिखलाने  लगे  कल्पनाएं उनकी अपनी है पर दूसरों पे तोहमत लगाने लगे  मुखोटा उतरा नहीं जिनका कभी  वो दर्पण मुझे दिखलाने  लगे  मतिमंद और आडम्बरी किचड़े में जो धसे हुए  राम के लायक नहीं है सिय  मुझे पवित्र से पतित बनाने लगे  तिलक लागा और टिका कर  मनघडंत कथा सुनाने  लगे  जिनके अपने करम है काले वो वैदेही पे ऊँगली उठाने लगे  मर्यादा पुरुषोत्तम राम सही  सीता को धारती में समाना था  समाज की कुरीतियुओं  से  कितना मुश्किल बच पाना था  आज भी दे रही अग्निपरीक्षा  कैसा ये दोष है  सतयुग हो चाहे कलयुग  औरत में ही खोट है ये फैसला करने वाला  आखिर समाज कौन  है ....?