वजह | WAJAH | Reason Of Living | Short Love poetry
WAJAH आंखों को तुझे देखने की आदत सी हो गयी हर दिन तेरे साथ गुज़रे ये फरियाद हो गयी , अब जी न सकेंगे यार हम तेरे बैगर तू मेरे जीने की वजह जो हो गयी ।