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घटिया लोगों से पहचान नहीं , क्यूँ समझदारों की भीड़ में चर्चा है आपका, और कुछ नहीं है खोने को मेरे पास

 प्त्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं  समझदार को इशारे की ज़रूरत नहीं  जल में रहकर मगर से बैर नहीं  और घटिया लोगों से पहचान  नहीं  भला करते करते  बुरा कर गए  रकीबो से मिलके दगा  कर  गए  गले लगा के प्यार से मुझको  मेरे सीने में खंजर उतारते चते गए  क्यूँ समझदारों की भीड़ में चर्चा है आपका जो  उड़ा रहा है मजाक  जमाना आपका  दिल से लिए है फैसले तो  बात मान लो जहाँ दिमाग लगे वहाँ न दिल लगाया करो और कुछ नहीं है खोने को मेरे पास  एक तुम  हो  और तुम्हीं हो जीने का आसरा  ऐसे ही जिंदगी तेरी याद में बिताई  तकतें रहे चांद को सीने से फोटो लगाई  हर उम्मीद अपनी ना उम्मीद हो गई  जब चांद के ऊपर बदरी छा गई 

खाली जेब की थी अपनी रईसी अपना वक़्त था के नासमझी थी

अपना वक़्त  था के नासमझी थी  जिंदगी बहुत खूबसूरत थी  थे अपने गुमान में गुम  अलग ही दुनिया थी  बातों बातों में ताली  हसी ओर ठिठोली  दिनभर गुनगुनाना  दर्पण देख मुस्कुराना  वो किस्से कहानी  रोज महफिल सजानी  झूठ बोल के रोज दोस्तों से मिलना पैसे इकठ्ठे करके फिर मूवी देखना  बाद में लगे सब अपना पराया बताने  याद आते है वो गुजारे ज़माने  खाली जेब की थी अपनी रईसी  जोड के पैसे की खाइशे पूरी  ना मोबाइल ना कोई कैमरा  जिंदगी थी एक खूबसूरत आईना