खाली जेब की थी अपनी रईसी अपना वक़्त था के नासमझी थी
अपना वक़्त था के नासमझी थी
जिंदगी बहुत खूबसूरत थी
थे अपने गुमान में गुम
अलग ही दुनिया थी
बातों बातों में ताली
हसी ओर ठिठोली
दिनभर गुनगुनाना
दर्पण देख मुस्कुराना
वो किस्से कहानी
रोज महफिल सजानी
झूठ बोल के रोज दोस्तों से मिलना
पैसे इकठ्ठे करके फिर मूवी देखना
बाद में लगे सब अपना पराया बताने
याद आते है वो गुजारे ज़माने
खाली जेब की थी अपनी रईसी
जोड के पैसे की खाइशे पूरी
ना मोबाइल ना कोई कैमरा
जिंदगी थी एक खूबसूरत आईना
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