घटिया लोगों से पहचान नहीं , क्यूँ समझदारों की भीड़ में चर्चा है आपका, और कुछ नहीं है खोने को मेरे पास
प्त्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं
समझदार को इशारे की ज़रूरत नहीं
जल में रहकर मगर से बैर नहीं
और घटिया लोगों से पहचान नहीं
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भला करते करते बुरा कर गए
रकीबो से मिलके दगा कर गए
गले लगा के प्यार से मुझको
मेरे सीने में खंजर उतारते चते गए
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क्यूँ समझदारों की भीड़ में चर्चा है आपका
जो उड़ा रहा है मजाक जमाना आपका
दिल से लिए है फैसले तो बात मान लो
जहाँ दिल लगे वहाँ दिमाग न लगाया करो
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और कुछ नहीं है खोने को मेरे पास
एक तुम हो और तुम्हीं हो जीने की आस
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