शतरंज की महाभारत, Selfish Relarions,
अपने ही अपनों से दूर हो गए
बंटवारा करने को मंजूर हो गए
स्वार्थ से जुड़े रिश्ते,
स्वार्थ सिद्ध होते ही
नजरों से दूर हो गए
शतरंज की चालों ने महाभारत करा दी
द्वेष और क्रोध ने बुद्धि भ्रष्ट करा दी
शकुनी की कूटनीति ने मिट्टी लाल करा दी
पितामह की चुप्पी ने शैय्या बिछा दी
नेत्रहीन राजा के फैसले ने अनीति करा दी
अपमानित कुल वधु ने प्रतिज्ञा ले ली
आपसी रंजिश, जिद और बदले की भावना ने
हस्तिनापुर की हस्ती मिटा दी l l
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