सुबह की चाय | Morning Tea | Short Poetry
| सुबह की चाय |
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ये उगती सी धूप
महके से गुलाब
धीरे से कहना ,
कैसे है आप ?
बस यही है मेरे लिए
सुबह की चाय , जनाब !!
| सुबह की चाय |
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ये उगती सी धूप
महके से गुलाब
धीरे से कहना ,
कैसे है आप ?
बस यही है मेरे लिए
सुबह की चाय , जनाब !!
Bahut hi swadist chai hai....k
जवाब देंहटाएंवास्तविक रूप में है
जवाब देंहटाएंसच में रात ढलती है सुबह होती है लेकिन कुछ लोगों का इसके बिना सबेरा नही होता।
जवाब देंहटाएंWaah kya chaay hai Anand aa gaya 😍😍
जवाब देंहटाएंMeri Taraf se aapko bhi chaay☕☕☕
जवाब देंहटाएंBadiya chaay hai...Mazza a gaya subah ki chaay mein..🙂🙂🙂🙂🙂
जवाब देंहटाएंSoo tasty Chai
जवाब देंहटाएंnice chayee janab
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