सुबह की चाय | Morning Tea | Short Poetry

 सुबह की चाय

***********************************


ये उगती सी धूप

महके से गुलाब

धीरे से कहना ,

कैसे है आप ?

बस यही है मेरे लिए 

सुबह की चाय , जनाब !!



टिप्पणियाँ

  1. सच में रात ढलती है सुबह होती है लेकिन कुछ लोगों का इसके बिना सबेरा नही होता।

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

Comments

Popular One's