ख्याल | four lines on Khayal or Care |Short Poetry on Love


ख्याल 

  

  





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  *** ख्याल ****                

हर वक़्त और हर पहर

क्या शाम और क्या सहर 

तेरा ख्याल है मुझे 

रहूँ चाहे किसी शहर !









टिप्पणियाँ

  1. सही लिखा आप ने सुंदरता अपने मन मे होती है सुंदरता किसी शहर कि जागीर नही है। राम राम

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