खोखले रिश्ते | Hindi poetry on Divorce | Separation | Breaking Relations of love | Ego & Misunderstandings | Incompatible Relations
| खोखले रिश्ते |
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तेरा अधिकार ही बहुत था
मुझको रोकने के लिए
अफ़सोस तुमने कभी
आवाज़ न दी ।
दो प्यार के बोल ही काफी थे
टूटे रिश्तों को जोड़ने के लिए
तकलीफ के तुमने कभी
कोशिश न की।
दूर इतना भी न थे
के पुकारा न गया
फासले तो चंद कदमो के थे
अफ़सोस तुमसे आया न गया
खुद से ज़ादा विश्वास था जिनपे हमें
समय ने वो धारणा बदल दी।
मंजूर तो न था हमें किस्मत का फैसला
दुःख तो है अपनों ने नज़ारे ही फेर ली
हाँ, शिकायत रही हमें खुद से भी
के खोखले रिश्तों की यादें कभी दिल से न गयी
Dupar didi
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंक्यो किसी रिस्तो को बदनाम करे
जवाब देंहटाएंमैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ
जवाब देंहटाएंतुम मत मेरी मंज़िल आसान करो
श्रम के जल से राह सदा सिंचती है
गति की मशाल आंधी मैं ही हँसती है
शोलों से ही शृंगार पथिक का होता है
मंज़िल की मांग लहू से ही सजती है
पग में गति आती है, छाले छिलने से
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो
मैं तूफ़ानों में चलने का आदी हूँ
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो। राम राम
चाहूं मे तुझे साझ सबेरे क्यों की ..................…..................
जवाब देंहटाएंGreat legal team with proven experience. military divorce lawyer
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