# वही शाम, Sad Poetry On Missing Love, Memories & Old Remembrance
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| वही शाम - Memories |
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चली है फिर तेरे यादो की आँधी
और साथ ले आयी वही शाम पुरानी
और तेज़ हो गयी धड़कने हमारी
फिर कैद कर लिया तेरे साये ने मुझको
और तेज़ हो गयी धड़कने हमारी
रह गए सब अरमान सीने में दबकर
साथ रह गयी है बस कहानियां हमारी
फिर पुकारा है किसी ने नाम से तुम्हारे
है अब तुम्हारे नाम से ही पहचान हमारी।

kya bat hi didi
ምላሽ ይስጡሰርዝV nice
ምላሽ ይስጡሰርዝnice poem
ምላሽ ይስጡሰርዝआप के कविता का भाव दिल को हिला देता है इतनी भाव पूर्ण लिखना भी ठीक नही जो हर किसी पर लागू हो l
ምላሽ ይስጡሰርዝरविन्द्र पाण्डेय
Thanks😊😊
ሰርዝHow creative you are 🤩
ምላሽ ይስጡሰርዝThnx dear
ሰርዝHamen bhi Vahi Sham Yad a gai
ምላሽ ይስጡሰርዝBahut sundar 👌🏻❤❤👌🏻
ምላሽ ይስጡሰርዝGood
ምላሽ ይስጡሰርዝ