क्या ज़िद थी तेरी - गलतफ़हमी पर दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता | By Vinita Mishra
क्या ज़िद थी तेरी के दूर हो गए
सही होके भी हम गलत हो गए
तेरे फैसलों ने मजबूर इतना किया
के पास रहके भी तुझसे दूर हो गए
सच साबित न कर सके हम कभी भी
और झूठ के आगे तेरे मजबूर हो गए

आप बहुत सुंदर लिखती हो पर देखो कविता बहुत ज़्यादा मार्मिक नही लिखा करते 👌✍️❤️
जवाब देंहटाएंNice 👍 poem.. aapki poem pdke lgta hai jese meri filings ko aap sabd de deti.. ,,😘,...k
जवाब देंहटाएंजिंदगी की हकीकत को शब्दों में पिरोया बहुत खूब 👏👏
जवाब देंहटाएंKya baat 💖
जवाब देंहटाएंLast 4 lines are 👍👍
जवाब देंहटाएंThanku all
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