ना रहो आश्रित किसे पे अपनी खुशी के लिए, Selfish Relations, Relations Of Today's Generation
जबरदस्ती के रिश्ते ऐसे जुड़े है
दरारे है दरमियाँ फिर भी टिके है
कहने को अल्फाज़ नहीं है
गैरों से कुछ क्रम नहीं है
रहते है एक छत के नीचे
फिर भी कोई बात नहीं है
औपचारिकताएं ही शेष है
रिश्ते अब ना विशेष है
मान सम्मान खत्म हुआ
अपना घर ही जैसे परदेस है
अब ना अपने ना अपनापन
बस मैं खुश और मेरा जीवन
अब रिश्तों की तरकार नहीं
बंध के रहना रिश्ते में प्यार नहीं
रिश्तेदार है ये, ना होंगे खुशी
ना मानेगा एहसान कोई
अच्छा करके भी जो बुरा कहेगा
ऐसा रिश्तेदार हर घर में मिलेगा
आपका जीवन है आपके लिए
जियो इसे अपनी खुशी के लिए
जो रहा दुख में संग रहेगा सुख में
ना रहो आश्रित किसे पे
अपनी खुशी के लिए
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