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Showing posts from November, 2025

तोतू My Lucky Parrot, परिंदो के लिए ही बना आसमान है

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है एक कहानी तोतू की  मेरे प्यारे से तोते की मिला था अँधेरी रात में फसा था किवाड़ की आड़ में था बस महीने भर का सहमा हुआ सोचा क्या करू अब इसका  लपेटा दुप्पटे में फिर सहलाया प्यार से उसको लकी तोतू  बुलाया फिर रखा उसको एक जूते के डब्बे में दिए दाने चने के प्याली   में  हथेली से छोटा नन्हा सा परिंदा कभी मारु सिटी कभी ताली बजाउ फेरु ऊँगली उसपे लकी लकी दुहराऊ दी दवाई उसको घायल मिला था  चौबीस घंटे में एक बार बोलता था  आदत मुझे उसकी होने लगी थी  अकेली से दुकेली होने लगी थी  तीन महीने में लकी ने उड़ना सीखा  खिड़की दरवाजे पे चढ़ना सीखा  मिल गया था खिलौना जैसे मुझे  अब नहीं थी ज़रूरत किसी की मुझे  दिन बीते उसकी बोली को सुनते  रहता संग मेरे छुपता फुदकते  लाल रंग का मुँह और पूरा हरा था  छोटे से पंखो को प्यार से फेरता था  गोद में लेके बैठी थी मक्के के दाने बुलाया उसे वो लगा पंख फ़ैलाने  देखते देखते छत पे  उड़ गया वो बुलाया बहुत पर न लौटा कभी वो  बहुत रोइ पछताई लकी लकी चिलायी निरमोही ने न कोई सिटी बजाई...

जंगल का राजा कौन, Children Story, Jungle's King, कोयल बुलबुल गोरैया भी कठफोड़वे के हित में बोले

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आओ सुनते है एक कहानी जंगल के राजा शेर की मनमानी  आंखों है लाल और भोंहे है तानी कौन है भालू और कौन है हाथी सब पे हुकूमत अपनी ज़मानी चूहे बिल्ली तीतर बटेर ये सब है दरबारी  मंत्री लोमड़ी को बना दिया जिसने सबकी बुद्धि हरली जानवरो  की चालाकी सब अपनी गठरी में भरली चीता, बाघ ,सियार, ज़ेबरा दिनभर करते सलामी  शोर मचाया कठफोड़वे ने अब राजा बनना मेरी बारी  खोरड़ कर दूंगा सिंघासन जिसकी लकड़ी सबसे निराली  गिलहरी कूद कूद चिलाये क्या है अपनी जान गवानी बस एक दहाड़ होगी राजा की फिर तेरी  शामत आनी कोयल , बुलबुल , गोरैया भी कठफोड़वे के हित में बोले  सभी पक्षी मान गए बोले कठफोड़वे को राजा चुन ले राजा बड़ा दिलवाला था मान गया वो सबकी बात  आने वाले शनिवार को होगी ताज पहनने की रात बन गया राजा कठफोड़वाऔर लगे सब पक्षी गाने  पर एक दिन लाया शिकारी चुगने के लिए दाने  सर्दी की थी  धूप और लगा चिडियो को फ़साने  एक -एक कर सब पक्षी फस गए लगे रोने चिल्लाने  बुलाने लगे कठफोड़वे को राजा राजा दोहराने  वो था...

इस खुले आसमान के नीचे अब भी सुकून बाकी है, Passing Life,

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बीत रही है सुख - दुख के किस्सों की जिंदगी कह रही है बढ़ती उमर रुकजा ए जिंदगी माना तजुरबे है बहुत फिर भी सीखना बाकी है रिश्ते में लगी गांठो को अभी सुलझाना बाकी है कुछ चेहरे धुंधले हो गए उन्हें आंखों में उतारना बाकी है कुछ बातें अधूरी रह गईं उन्हें पूरा करना बाकी है दिल पे बोझ है जो उसे उतारना बाकी है अलिंगन करके बीते कल को फिर से जीना बाकी है राह में दिखे मंजर को फिर से दोहराना बाकी है लब पे ले आए मुस्कान जो वो लम्हा देखना बाकी है छूट गया जो टूटा तारा उसे फिर  से देखना बाकी है चांदनी रात में चांद के साथ चलना बाकी है दिल में कल्पनाएं हैं बहुत उन्हें कागज़ पर उतारना बाकी है लगता है इस खुले आसमान के नीचे अब भी सुकून बाकी है..

रहु धरती माँ के संग, Village Life, Living With Nature

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जानते है एक गांव है नदी किनारे बसा हुआ  बांस ओर पाकड़ के                                                                                           पेड़ से घिरा हुआ प्राचीन मंदिर लाल कुआ पहचान पुरानी लिए हुआ आम के बाग महुआ के पेड़                                                      खेत खलियआन से सजा हुआ सावन में बारिश का शोर  पगडंडी पे नाचे मोर ठंडी में छीमी की खेती घर घर बनती घुघरी रोटी गरमी में पके आम की दाल संग सत्तू भौरी चोखा अचार पतझड़ में है बेल का रस चना चबैना गुड़ और चिवड़ा चूल्हे पर है मोटी रोटी उसकी तयारी शाम से होती लकड़ी काटो ऊपरि लाओ गोधूलि बाद रसोई लगाओ नौ बजे लग गई है खटिया  पांच बजे फिर उठना भ...

अम्बिया (आम का पेड़) दो जीवन किसी को बनो कारण ख़ुशी का लगाओ पेड़ ऐसा जो बने सहारा सभी का

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फिर आई अमुआ के पेड़ पर बौर   खटास अम्बिया की  महक रही सड़क की ओर  फैला हुआ है सरपत जैसे  बना है खग  विहग का डेरा  मिलती है राहगीरों को छाँव मचता है कोलाहल सुभू शाम  कीट पतंगे चींटे माटे  वयस्त रहते घर इसमें बनाते  बच्चों की  फौज रोज हल्ला मचाये  अमुआ के तले चल घर एक बनाये  पकड़म पकड़ाई या छुपम छुपाई गिल्ली डंडा कभी चोर सिपाही ना जाने क्या खेल है खेले दादाजी आये सुबह  दातुन लेने  है सबका सहारा आम का पेड़ सड़क  किनारे लगा है पेड़  रहे  इंतज़ार कोयल की कुहक का  सुहाना हो मौसम तो गाना ख़ुशी का लगे अबके आम तो निशाना उम्मीद का किसी चिके से न टूटे शीशा किसी का है सबके हिस्से में आये पांच आम  खाना उसको नमक लगा के राधे शयाम हो जाए मुश्किल टिकोरों  का पकना जब हो हमला वानर दल का बजाये ताली और शोर मचाये  बच्चे बंदर आया चिल्लाये चाचा की चाय इलाची महकाये  पेड़ के बगल में मजमा लगाए  रोज़ एक कहानी सुनाता आम के पेड़ है सबका अभिमान आम का पेड़  दो जीवन किसी को बनो कारण  ख़...