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       Short Poetry On Past


क्या खबर थी की ऐसा वक़्त होगा

जो सोचा न कभी वो हक़ीक़त होगा ,

जो रहता था आंखों के सामने हमेशा

वो आज एक बीता हुआ कल होगा !!

टिप्पणियाँ

  1. खुद की कस्ती डुबोने पे मचल जाऊगा l
    जिद करोगी मासूम बच्चे की तरह,
    किसी बड़े जंगल मे चला जाऊगा ll
    राम राम

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