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नववर्ष मंगलमय हो, Happy New Year , New Year Wishes

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  आगामी वर्ष आप सभी के जीवन में अपार खुशियां और सम्पन्नता लाये  नववर्ष मंगलमय हो l l

Happy New Year, 2026, आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, New Year Wish In Hindi

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आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं  नया साल आप सभी के जीवन में सफलता और खुशिया लाये

ना रहो आश्रित किसे पे अपनी खुशी के लिए, Selfish Relations, Relations Of Today's Generation

जबरदस्ती के रिश्ते ऐसे जुड़े है  दरारे है दरमियाँ फिर भी टिके है  कहने को अल्फाज़ नहीं है  गैरों से कुछ क्रम नहीं है  रहते है एक छत के नीचे  फिर भी कोई बात नहीं है  औपचारिकताएं ही शेष है  रिश्ते अब ना विशेष है  मान सम्मान खत्म हुआ  अपना घर ही जैसे परदेस है  अब ना अपने ना अपनापन  बस मैं  खुश और मेरा जीवन  अब रिश्तों की तरकार नहीं  बंध के रहना रिश्ते में प्यार नहीं  रिश्तेदार है ये, ना होंगे खुशी  ना मानेगा एहसान कोई  अच्छा करके भी जो बुरा कहेगा  ऐसा रिश्तेदार हर घर में मिलेगा  आपका जीवन है आपके लिए जियो इसे अपनी खुशी के लिए  जो रहा दुख में संग रहेगा सुख में  ना रहो आश्रित किसे पे  अपनी खुशी के लिए 

झूठ की परत चाहे कितनी दोहरस हो , सच सामने आएगा जरूर बस अपने समय का इंतजार करो

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हर जिक्र में नाम  तेरा जिंदा रहने के लिए ख्याल  तेरा  यूं ही नहीं आ जाते आंखो में अश्रु रह-रह के मेरे सामने चेहरा आता है तेरा और कितना बदनाम करोगे रिश्ते को मेरे कब तक झूठी अफ़वाहे सुनेंगे लोग तेरे खारा है अगर समंदर तो खारा ही रहेगा  दर्पण तो दर्पण है चेहरा उसमे  असली ही दिखेगा लोग झूठी बातों का पहाड़ बनाये बैठे थे रेत के ढेर पे मचान सजाये बैठे थे समय की लहरों ने पहाड़ों को समन्दर में मिला दिया देखते ही देखते झूठे लोगों के मुँह से नकाब हटा दिया  झूठ की परत चाहे कितनी दोहरस  हो  सच सामने आएगा जरूर  बस अपने समय का इंतजार करो ।।  J

कुंती पुत्र दानवीर कर्ण महान , मित्रता की पहचान कर्ण, सूर्य पुत्र कर्ण, Karn

मित्रता की पहचान  एक दोस्त का अभिमान  और कोई नहीं है कुंती पुत्र  दानवीर कर्ण महान  ऋषि दुर्वाशा के वरदान से  जिज्ञासु कुंती माँ ने  सूर्य का आवाहन किया लोक लाज के भय से  नवजात को जल में प्रभावित किया पाला जिसको अधिरथ और राधे मां ने  और राधे पुत्र नाम मिला  जन्म से ही कानो में सोने के कुण्डल  और कवच मिला  अतुलनीय बल और तिव्र बुद्धि  शास्त्रो में निपुण, रणनीति विचार राजसी कुल के जन्मे   फिर भी सूत पुत्र पहचान सूर्य पुत्र होके भी  ना मिला पिता का का नाम  मित्र प्रेम और दान  जिसकी रग रग में विदमान नहीं लौटा कभी  उसके दरसे कोई खली हाथ  जीवन भर जो प्रेम को तरसा असली पहचान पाने को तड़पा लिया ज्ञान गुरु द्रोणाचार्य से फिर भी पक्षपात को होते देखा बाना अंग राज्य का राजा  प्रजा को खुश रखनेवाला जो बोले वो कारनेवाला  अर्जुन से  प्रतिस्पर्धा   करने वाला  दुर्योधन का अति प्रिये  कौरवों की सेना का सेनापति  अर्जुन के हाथों वीरगति परशुर...

हम प्रभु तेरी शरण है, तेरे कारन जीने की वजह मिल पायी , Shri Radhe krishna

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शुक्रिया हर कदम पे तेरा उम्र भर साथ मेरा दे दिया  क्या कहु तुझको सब पता है  बिना इशारे के तेरे न पत्ता हिला है  तेरी लेखनी पे सदा चिंतित रहा   कृपा से जैसे  तेरी वंचित रहा  अंधेरो में भी तूने उजाले दिखाए बीते वक़्त मेरे सामने सबक बनके आए याद करू जिसको वो किस्से बन गए  तेरे रूप में फ़रिश्ते मिल गए  साथ  भगवन तूने हमेशा दिया है  पुकारू जिसे वो आसरा बन गया है  दिन की शुरुवात है नाम से तुम्हारे  मन में बस्ते हो श्री कृष्ण प्यारे  गुमराह हुए जब जब राह तुमने दिखाई तेरे कारन जीने की वजह मिल पायी l है माटी की काया किराये का जीवन एक नाम तेरा सच्चा बाकि भरम है  इसीलिए हम प्रभु तेरी शरण है  ll

राजू का काजू प्रेम # ध्यान अपना रखना अहम बात है # माँ बस मुझे दे दो काजू

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एक लड़का था राजू  बहुत खाता था काजू दिन भर शैतानी और मनमानी  रोज़ कक्छा में बस डाँट खानी था वो गरीब , माँ नौकरी  करती  थी काजू की फैक्ट्री में काम करती थी बाप था मिस्त्री घर था बनाता  बेटे को बहुत प्यार था करता  एक दिन माँ ने छुपा के रखे थे काजू बेचने  थे पडोसी  को रुपये थे जुटाने  देखे जो काजू राजू ने तरकीब लगाई मेज पर चढ़कर अपनी  लम्बाई बढाई नन्ही हथेलियों को उसने बरनी में डाला  भरी दोनों मुट्ठी पर उन्हें निकाल न पाया बरनी का मुँह छोटा  था  और हाथ फंसे थे  दर्द से उसकी आँखों से आंसू निकले थे रो - रो के माँ माँ चिल्ला रहा था मेज़ से उतरने में डर रहा था  आवाज रोने की  पड़ोसी सुन रहे थे खुली थी खिड़की उसको समझा रहे थे पहले छोड़ो काजू फिर एक हाथ निकालो उसके बाद  दूसरे हाथ को निकालो राजू बोला फिर ना काजू मिलेगा  खाली हाथ बरनी से नहीं निकलेगा हस रहे थे पडोसी पर वो रो रहा था कैसे निकलेगा काजू सोच रहा था  थक गया रोते रोते और कराहते  छोड़े काजू उसने...

तेरी आँखों की नमी मेरी आँखों में है Poetry On Love &Trust हर शाम ढलते सूरज के इंतज़ार में है राह देखता है कोई इस विश्वास में है

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तेरी आँखों की नमी मेरी आँखों में है अनकहे अल्फ़ाज़ तेरे मेरे ज़हन में है बालो से गिरा फूल  अब भी किताबो में है माफ कीजिए कहते हुए अल्फ़ाज़ खयालो में है  हर शाम ढलते सूरज के इंतज़ार में है राह देखता है कोई इस विश्वास में है हाथ उठते  है जिसके दुआ मंगाने के लिए उन लकीरों में मेरा नाम तो है कसमें खाई थी साथ रहने की कभी  बेशक उन कसमों पे ऐतबार तो है कहने को तो ज़िन्दगी अकेले गुजार दी सजाने को तेरी यादो का गुलिस्तांन तो है  लेके चले है अपने खव्बो का आस्मां साथ देने के लिए ये चाँद तारे तो है कह दिया है हाले दिल चुपके से कान में सुन ने के लिए पूरी कायनात तो है