इतरा रहा है खुद पर चाँद बेईमान

ठहरा हुआ आसमान है चल रहे है तारे 
कहता है चांद हम भी साथ है तुम्हारे 
छुप रहा बादलों में यूँ करके इशारे 
देखता हूं रात कैसे बीते बिन हमारे 

शोभा है आसमान की ओर तारों की शान 
इतरा रहा है खुद पर चाँद बेईमान 
रोज नया रूप है और रोज ही कलाएं 
कैसे कोई चाँद को दिल से लगाए 

देख के जिसको मन भरमाय
दीदार ऐसा के रैन कट जाए 
रात भी जिसको गले से लगाए 
अंधियारे को दूर भगाए 
सफर का साथी जो बन जाए 
ऐसा मीत सबको भाए 
जो बिन बोले दिल की..... 
बात समझ जाए....










टिप्पणियाँ

Popular One's