जिंदगी हर मोड़ पे बदल जाती है
कभी उलझती है तो कभी सुलझ जाती है
जिंदगी क्या कहें हर मोड़ पे बदल जाती है
आंखों को सपने दिखा नींद से जगाती है
बिना पंखों के उड़ना सिखाती है
मन के वेग को ख़ाहिश के आसमानों तक
क्षितीज के पास कहीं दूर तलक ले जाती है
कभी उलझती है तो कभी सुलझ जाती है
जिंदगी क्या कहें हर मोड़ पे बदल जाती है
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