चित्तकबरा सियार और जंगल का राजा l ग़द्दार का अंत होता बुरा है विश्वास तोड़ना किसी का बहुत बुरा है








बात है बरसातों की जंगल के जानवरों की अत्याधिक बारिश और जल भराव के कारण बुरी हालत थी पशुऊ की...

खाने को कुछ घास नहीं थी पेड़ पत्तियाँ सब भीग गई थी व्याकुल थे पशु भूख से और परेशान थे प्रकृति की मार से 

बिलों और गुफाओं में पानी था भर गया फिसलन और कीचड़ से बुरा हाल था हो गया 

टूटी थीं ना जाने कितनी शाखाएं बेघर हुए थे मासूम कीट पक्षी और नन्ही लताएँ 

भीषण बारिश और तेज हवाएं जल मग्न जंगल और मेघ बिजली चटकाए 

डरे थे सभी पक्षी.. पीपल नीचे बैठक लगाए क्या करे आगे कुछ युक्ति लगाए 

शेर बोला अब तो कुछ करना पड़ेगा वर्ना यारों सबको मरना पड़ेगा 

भेड़िया बोला जंगल अब छोडना पड़ेगा डेरा कहीं और अब लगाना पड़ेगा 

चुप था चितकबरा सियार ना कुछ बोलता था आँखों में आंसू भर रो रहा था 

लोमड़ी बोली कुछ उपाय बताओ मुश्किल समय में चितकबरे ना आंसू बहाओ 

सियार अपनी होशियारी में था मौकापरस्त शिकार की फ़िराक़ में था 

बोला किसी पशु को बलि देनी पड़ेगी ये मूसलाधार बारिश तभी रुकेगी 

जानवर थे मौन ना कुछ बोलते थे एक दूसरे को बस देखते थे 

हाथी बोला किसकी बलि देंगे सभी भूख से तड़प रहे भगवान भी दुखी होंगे दशा इनकी देख के 

सियार हठ करके बोला तो फिर क्या हम बारिश में मरेंगे 

भेजो सुनहरे खरगोश को लाल चट्टान के पीछे सुना है वहां बलि के बकरे कटते 

हम सबकी मुराद ये पूरी करेगा शीश अपना चढ़ा के बारिश की दुविधा दूर करेगा 

जाऊँगा लेके इसे कल सुबह सबसे पहले, अगले दिन फिर जाएंगे हिरन को लेके.. सिलसिला ऐसे चलता रहेगा जबतक ना बरसात का रेला रुकेगा 

दुखी थे सभी जानवर बस रो रहे थे कैसे बचे आपदा से सोच रहे थे 

शेर राजा को लेकिन शक् हो रहा था चितकब्रें सियार को पहचान रहा था 

राजा बोला ठीक, में भी साथ चलूंगा भगवान के आगे हाथ जोड़ लूँगा 

सियार ठिठका और चिल्लाया राजा है आप समझ क्यूँ नहीं आया

आप जंगल  सम्भाले  ये मुश्किल घड़ी है किन्तु सुनहरे की बली में ना विघ्न डाले 

सुबह होते ही चितकबरा सुनहरे को लाल चोटी पर लेके भागा उसके पीछे चुपके से शेर भी निकल के भगा 

घने जंगल के बीच पहुच सुनहरे पे सियार झपटा और उसे नीचे गिराया.. जैसे ही खाने को मुख खोला शेर को सामने पाया 

लाल आंखे लिए राजा गुस्से से तमातमाया मार कर चितकब्रें को उसे चैन आया 

लाल चोटी के मंदिर जा माँ को मनाया रोक दो जंगल की बारिश बार बार दोहराया 

वापिस आके जानवरों को सारी बात बतायी कहा मुश्किल समय में एकजुट रहो सारे भाई 

ग़द्दार का अंत होता बुरा है विश्वास तोड़ना किसी का सबसे बुरा है 

हुए चार दिन बारिश थम गई है राजा की दुआ जैसे कुबूल हुई है 

चिड़िया चेहचाहाय, मोर शोर मचाये, हिरण की छलांगे मोहित कर जाए, हाथी चिंघाड़ए और कोयल गाए जंगल के पुराने दिन लौट आए 











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