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Showing posts from September, 2025

खुश रहो और सबको खुश रहने दो # ईश्वर का आश्रय है #सृष्टि की हरेक रचना का आभार

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घर में आज अकेली थी कविता ही लिखने बैठी थी देख लिया जब इसको मैंने ये खिड़की में  दुप्की थी न जाने कितना संयम है घंटो तक ना हिलती है एकटक है देख रही एकाग्रता इसकी गहरी है तय माँ लक्ष्मी का घर पे आना अगर लक्ष्मी पूजन के दिन  छुछुंदर या छिपकली का  घर में  दिख जाना   है शुभ है इनका दीवाली  के दिन आना  माँ लक्ष्मी की कृपा को पाना  माना घर अंगना है सबका पर पालतू पशु , पक्षी और जीव जंतु इनका भी यही ठिकाना है करते ये भी देखभाल इनका भी घर में  आना जाना है  ईश्वर का आश्रय है अगर तुम्हे  तो इनको भी आश्रय दो सृष्टि की हरेक रचना का  आभार व्यक्त किया करो  एक कौर चावल चिड़िया को एक रोटी सड़क की गइया को कभी पानी किसी प्यासे को मीठे बोल ठेलेवालों को दिल अपना यारो बड़ा करो खुश रहो और सबको खुश रहने दो !!

वो सीता पे ऊँगली उठाने लगे # Ramayan # Society & Its Impact #RamSita #Ram Ki Lilla

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      मेरे अपने मुझको परखने लगे  खुद अपना परिचय देने लगे  सबित ना कर सके मुझको जब  मेरे चारित्र पे ऊँगली उठाने लगे  तमाशा देखना है आदत जिनकी  वो किरदार मुझे समझने लगे  जात पात और ऊंच नीच  मुझे धरम अधर्म सिखलाने  लगे  कल्पनाएं उनकी अपनी है पर दूसरों पे तोहमत लगाने लगे  मुखोटा उतरा नहीं जिनका कभी  वो दर्पण मुझे दिखलाने  लगे  मतिमंद और आडम्बरी किचड़े में जो धसे हुए  राम के लायक नहीं है सिय  मुझे पवित्र से पतित बनाने लगे  तिलक लागा और टिका कर  मनघडंत कथा सुनाने  लगे  जिनके अपने करम है काले वो वैदेही पे ऊँगली उठाने लगे  मर्यादा पुरुषोत्तम राम सही  सीता को धारती में समाना था  समाज की कुरीतियुओं  से  कितना मुश्किल बच पाना था  आज भी दे रही अग्निपरीक्षा  कैसा ये दोष है  सतयुग हो चाहे कलयुग  औरत में ही खोट है ये फैसला करने वाला  आखिर समाज कौन  है ....?

धरती माँ तेरे तेरे चरणों में स्वर्ग मिले # प्रकृति की देन #Nature Is The Real Treasure # Nature Is The Source Of Our Life Protect & Preserve It

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खूबसूरत दृश्य जो मैंने  देखा वो है प्रकृति की देन बड़ी  और  लगाओ पेड ,वनस्पतियां  जिनकी  है हमको  जरुरत बड़ी  अपनी धारती से मिलता  फसल , फूल ,फल का चांदी सोना  क्यों न इनका संचय करे हम  और ख़तम करे पेड़ो  का कटना  हरियाली में जीवन है  इनसान तो क्या ! पशु पक्षी भी आभारी है  पहाड़, नदिया, पेड़ और जंगल  ईश्वर का ही रूप है देते हमको जल ,जीवन जो उनका रखवाला कौन है ? जागरूक हो और आगे बढ़ो प्राकृतिक सुंदरता न नष्ट करो  पुजनिया है धरती अपनी  इसको अपने सर माथे रखो  मिटे अपनी थकान सारी आंखों को आराम मिले सुन सकू जहाँ मैं अपने दिल की  धरती माँ  तेरे तेरे चरणों में स्वर्ग मिले । ।