ज़िद - हिंदी कविता * ZID HINDI KAVITA
क्या ज़िद थी तेरी के दूर हो गए
सही होके भी हम गलत हो गए
तेरे फैसलों ने मजबूर इतना किया
के पास रहके भी तुझसे दूर हो गए
सच साबित न कर सके हम कभी भी
और झूठ के आगे तेरे मजबूर हो गए
जो तूने कहा वो सह न सके हम
क्या सामना करते नज़र से दूर हो गए
जो उम्मीद थी मेरी वो न उम्मीद हो गई
जिसे साथ देना था वो सबसे पहले दूर हो गए
क्या खबर थी यूँ बिखरेगा आशियान मेरा
के घर जोड़ने वाला ही तोड़ेगा घर मेरा

आप बहुत सुंदर लिखती हो पर देखो कविता बहुत ज़्यादा मार्मिक नही लिखा करते 👌✍️❤️
ምላሽ ይስጡሰርዝNice 👍 poem.. aapki poem pdke lgta hai jese meri filings ko aap sabd de deti.. ,,😘,...k
ምላሽ ይስጡሰርዝजिंदगी की हकीकत को शब्दों में पिरोया बहुत खूब 👏👏
ምላሽ ይስጡሰርዝKya baat 💖
ምላሽ ይስጡሰርዝLast 4 lines are 👍👍
ምላሽ ይስጡሰርዝThanku all
ምላሽ ይስጡሰርዝ