सिलसिला - हिंदी कविता - SILSILA HINDI KAVITA

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सिलसिला








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ये सादगी  जो मन मोह लेती है 
क्या आना होगा कभी 
जो सड़के रुख मोड़ लेती  है 

क्या पता छोटी है ज़िन्दगी बड़ी
मिल जाओ  तुम भी कही 
क्या पता फिर चर्चा हो तेरे नाम का 
और बयान हो हाल  फिर अपने हाल का 

फिर चले हम किसी नए सफर पे 
जीवन की इस लम्बी डगर पे
फिर शुरू एक नया सिलसिला रहे 
मुझे तुझसे और तुझे मुझसे
फिर कोई भी जुदा  न करे। 




አስተያየቶች

  1. वाह वाह क्या बात हैI
    सिलसिला ये यूँ ही चलता रहेगा।

    सतीश।

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  2. Nice poem..
    Aapki poems ka silsila ese hi chltq rhe,🌹😊..,...k

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  3. V nice didi ये सादगी - जो मन मोह लेती है,

    क्या आना होगा कभी ?

    जो सड़के ..रुख मोड़ लेती है।



    क्या पता ! छोटी है ज़िन्दगी बड़ी !

    कभी मिल जाओ , तुम भी कही।



    क्या पता फिर - चर्चा हो तेरा नाम का ,

    और बयान हो हाल .. फिर अपने हाल का।



    फिर चले * हम किसी नए सफर पे

    जीवन की इस लम्बी डगर पे।



    फिर शुरू..एक नया सिलसिला रहे ,

    मुझे तुझसे और तुझे मुझसे

    फिर कोई भी जुदा न करे।।

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  4. वाह वाह आप कि भी रचना भी किस किस सुंदर भाव मे किया हो गा
    जिसकी रचना इतनी सुंदर ओ कितना सुंदर होगा R K Pandey

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  5. आप कि कविता तो मन मुग्ध कर देता है
    ये कैसी सिलसिला है,? सुंदर भाव

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  6. कया खूब वर्णन करती हैं
    आप अपनी कल्पनाओं का ,
    दुआ है ये सिलिसिला कभी न रुके
    आपकी अद्भुद रचनाओं का ।। 👏💞

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Comments