झूठ | Hindi Poetry On Immaturity | फितरत

फितरत







और कितना झूठ है सच में तेरे

फितरत तो तेरी जान ली यार हमने

क्या कहे तुझको ?

तू तो अपनी समझदारी में है !

खो दिया है सबकुछ 

फिर भी होशियारी में है !!


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