नियति * Niyati - हिंदी कविता

नियति - Destiny


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लिखना है पर शब्द कहाँ है 

सोचते है पर ध्यान कहाँ है 

कोई बता दे  हुआ क्या है 

हम है यहाँ  पर दिल कहाँ है ?


है एक  सन्नाटा पसरा हुआ 

हर कोना अकेले में  बसा हुआ

कोई बता दे  ये आलम क्या है  

हम है मौन  बाकियुओं को हुआ क्या है ? 


सब रास्ते है   रुके हुए 

पर भीड़ में सब चल रहे 

कोई बता दे जाना कहाँ है 

हम है तैयार अब जीना कहाँ है ?


है एक धुंध छायी हुई !

हर शख्स को  भरमाई हुई 

कोई बता दे  ये नियति  क्या है 

जिंदगी तो ठीक है   

कल का भरोसा क्या है !

                        

 

 

         


አስተያየቶች

  1. आपने अपनी इन पंक्तियों से आज के इस भागदौड़ का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है।जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है।

    सतीश।

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  2. अब जीना कहाँ है
    जाना कहाँ है

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  3. Sach me great poem......
    Aap hmari filings kese smjh jate ho...,😘.....k

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  4. कोई बता दे * ये नियति क्या है ?

    जिंदगी तो ठीक है !! कल का भरोसा क्या है ?

    Every time.. I feel like reading this poem

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Comments