नियति * Niyati - हिंदी कविता
नियति - Destiny
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लिखना है पर शब्द कहाँ है
सोचते है पर ध्यान कहाँ है
कोई बता दे हुआ क्या है
हम है यहाँ पर दिल कहाँ है ?
है एक सन्नाटा पसरा हुआ
हर कोना अकेले में बसा हुआ
कोई बता दे ये आलम क्या है
हम है मौन बाकियुओं को हुआ क्या है ?
सब रास्ते है रुके हुए
पर भीड़ में सब चल रहे
कोई बता दे जाना कहाँ है
हम है तैयार अब जीना कहाँ है ?
है एक धुंध छायी हुई !
हर शख्स को भरमाई हुई
कोई बता दे ये नियति क्या है
जिंदगी तो ठीक है
कल का भरोसा क्या है !

Waah mazaa aa gaya
जवाब देंहटाएंYes
हटाएंWow poem
जवाब देंहटाएंWaah
जवाब देंहटाएंYou have written a reality of life....
जवाब देंहटाएंI really your poem
जवाब देंहटाएंVery well explained...today's life
जवाब देंहटाएंआपने अपनी इन पंक्तियों से आज के इस भागदौड़ का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है।जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है।
जवाब देंहटाएंसतीश।
Shukriya Jii :)
हटाएंअब जीना कहाँ है
जवाब देंहटाएंजाना कहाँ है
Thanku all :)
जवाब देंहटाएंBahut sundar didi
जवाब देंहटाएंSach me great poem......
जवाब देंहटाएंAap hmari filings kese smjh jate ho...,😘.....k
कोई बता दे * ये नियति क्या है ?
जवाब देंहटाएंजिंदगी तो ठीक है !! कल का भरोसा क्या है ?
Every time.. I feel like reading this poem
Thanku All :-))
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