नज़रअंदाज़ - Short Poetry On Ignorance Or Avoidance In Love

 नज़रअंदाज़ 








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एक अरसा हुआ मिले 

तेरी मेरी बात हुए 

और कितना इंतज़ार करे 

सोचते है तेरी तरह 

हम भी तुझे नज़रअंदाज़ करे !



                

 

      

टिप्पणियाँ

  1. शब्दों की कमी नही है इस जहाँ में लेकिन आपके काम शब्द ही अच्छे।आपने कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया।

    तेरा वो अंदाज़
    मुझ से नही होता नजरन्दाज।

    सतीश।

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  2. तेरी तरह हम भी इंतज़ार करे
    एक अरसा हुआ मिले l
    तेरी मेरी बात हुए हम भी तुझे नज़रअंदाज़ करे ll

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