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चाँद का सफर तन्हा ही रहा है - Hindi Poem on Life by Vinita Mishra

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  फुर्सत में बैठे है आपने चाँद के साथ   हो रही है बातें शाम ढ़लने के बाद  देर से आया है दोस्त बादलों में छुपा नहीं  दिखा दी अपनी सूरत बहुत इंतजार के बाद  सोचा शिकवा करे पर दलीलें है बेकार बात  अखिर  शिकायत मुझसे यार ने की अर्से बाद  कह दिया इतने दिन राह तो हमने तकि आता रहा रोज फुर्सत तुम्हें आज मिली  मासूमियत इतनी  के चेहरे पे हसी खिली  क्या कहते जिंदगी रेत सी फिसल गई  किस्मत से बैठे है पहलू में तेरे.. कर्मों के जाल में जिंदगी उलझी रही  आईना था सामने सूरत बदली अपनी लगी  किस्मत को ग्रहण ने ऐसे छला है  कहने को पूरा आसमान है गर  चाँद का सफर तन्हा ही रहा है