जहाँ कोई नहीं वहां तू है प्रभु शिवजी best Mahadev bhakti poetry












जहाँ कोई नहीं वहां तू है प्रभु

हम सब में है जो जल रही

वो तेरी ही तो लौ है प्रभु

क्या बोलू कुछ कह न सकु

तुम तो शब्दों की श्रृंखला हो प्रभु 

उठते बैठते सोते  जागते

लब पे रहता तेरा नाम प्रभु

तेरा कोई स्वरुप नहीं 

फिर भी ख्याल आ जाता है

बंद करू जो आँखें अपनी

दर्शन तेरा हो जाता है












मेरे अंदर भीतर बाहर

गूंजता है तेरा नाम प्रभु

रहु कहीं मैं भगवन , लेकिन

तू रहता है मेरे साथ प्रभु ।। 




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