भटक गया मैं अपनी राह से ख़ुशी और गम मे | Life Of Drug Addict Poem by Vinita Mishra

भटक गया मैं अपनी राह से ख़ुशी और गम मे hindi poem on drug addiction

by Vinita mishra


भटक गया मैं अपनी राह से

ख़ुशी और गम मे 

आ गया बातों मे दोस्तो 

पिछड़ गया अपने लक्ष्य से 


खो गया सिगग्रेट के धुएँ

और ताश के पत्तो मे  

डुबो दिया खुद को मैंने 

शराब की लत मे 


रहना था नशे से दूर 

इसके ही करीब हो गया 

चौपट कर भविष्य अपना

एक नसेड़ी बन  गया 


धूम्रपान की आदत ऐसी लगी मुझे 

फिर न किसी की बात सही लगी मुझे  

घर परिवार से दूर लड़खड़ाता मैं रहा 

अनजान सड़कों पे न जाने कब सो गया


कहाँ  गिरा पता नहीं 

जो चोट लगी उसका अंदाज़ा नहीं  

हर दिन एक नया झूठ बोल के 

में  अपनी नज़र से ही गिर  गया 


गलती अपनी न सुधार सकूँ

ना किसी का आदर्श बन सकूँ  

नशे से हो गया साथ मेरा 

जो उतरने से पहले ही चढ़ गया 


घर ग्रहस्ती सब ख़तम हुई 

इज़त मेरी बेइज़्ज़ज़त हुई 

पत्नी बच्चे है सब दुखी 

अपनी ज़िन्दगी मैंने खुद बर्बाद की  


हूँ आगे बहुत निकल चुका 

नशे में  डूबा हुआ 

सही गलत में फरक नहीं 

अब रहा मैं सामाजिक नहीं  


है सबके लिए सन्देश मेरा 

जो हाल हुआ मेरा वो अपना न करना 


आगे है हम सबको बढ़ना  

नशे  की आदत से परहेज़ करना   

है अपने जीवन को सुखमय बनाना  

शराब और सिगरेट से दूर रहना 


बनो एक जिम्मेदार तुम

निभाओ बेटे का फ़र्ज़ तुम  

किस्मत से मिला है ये जन्म 

बनो किसी  का सहारा तुम  


कुल का दीपक वही है जो 

नाम करे अपने कुल का  

श्रवण कुमार न बन सको तो क्या 

अहम्  है काबिल इंसान बनना   


हो फ़क्र बेटे पर जिस माँ को 

ऐसी तुम संतान बनो   

किसी के राहों का दीपक बन 

जीवन अपना सफल करो 


Vinita Mishra

TheMisVi.Com



टिप्पणियाँ

  1. बहुत सही और सत्य भी है पर हर कोई यही सोचना चाहीए ओ चाहे स्त्री हो या पुरुष l
    राम राम जी

    जवाब देंहटाएं

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