भटक गया मैं अपनी राह से ख़ुशी और गम मे | Life Of Drug Addict Poem by Vinita Mishra
भटक गया मैं अपनी राह से ख़ुशी और गम मे hindi poem on drug addiction by Vinita mishra भटक गया मैं अपनी राह से ख़ुशी और गम मे आ गया बातों मे दोस्तो पिछड़ गया अपने लक्ष्य से खो गया सिगग्रेट के धुएँ और ताश के पत्तो मे डुबो दिया खुद को मैंने शराब की लत मे रहना था नशे से दूर इसके ही करीब हो गया चौपट कर भविष्य अपना एक नसेड़ी बन गया धूम्रपान की आदत ऐसी लगी मुझे फिर न किसी की बात सही लगी मुझे घर परिवार से दूर लड़खड़ाता मैं रहा अनजान सड़कों पे न जाने कब सो गया कहाँ गिरा पता नहीं जो चोट लगी उसका अंदाज़ा नहीं हर दिन एक नया झूठ बोल के में अपनी नज़र से ही गिर गया गलती अपनी न सुधार सकूँ ना किसी का आदर्श बन सकूँ नशे से हो गया साथ मेरा जो उतरने से पहले ही चढ़ गया घर ग्रहस्ती सब ख़तम हुई इज़त मेरी बेइज़्ज़ज़त हुई पत्नी बच्चे है सब दुखी...