FOUR LINES ON LOVE & COMPROMISE | समझौता | SHORT POETRY
छोटी सी ज़िन्दगी में कितना नाराज़ रहोगे ?
आ जाओ सुलह करलो हमेशा याद रहोगे।
ऐसी भी क्या बात जो इतना खफा हो !
इंतज़ार हुआ बहुत बस अब न सजा दो।।
छोटी सी ज़िन्दगी में कितना नाराज़ रहोगे ?
आ जाओ सुलह करलो हमेशा याद रहोगे।
ऐसी भी क्या बात जो इतना खफा हो !
इंतज़ार हुआ बहुत बस अब न सजा दो।।
जरुरी नही की पूरी हो हर एक ख्वाहिश इस जहाँ में ।
जवाब देंहटाएंकुछ का अधूरा रहना ही सुकून देता है।
Agree on love....K
जवाब देंहटाएंkya baat kya baat kya baat very nice
जवाब देंहटाएंराम राम बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंTruth of life
जवाब देंहटाएंWow amazing poem
जवाब देंहटाएंBeautiful words
👌👌👌 v nice
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंWow So Cool Poem and So Lovely Poem💝💝💝💝❤❤❤❤😍😍😍😍🤗🤗🤗🤗😊😊😊😊😘😘😘😘👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👏👏👏👏👍👍👍
जवाब देंहटाएंMast hai mam keep it up I really like your poem
जवाब देंहटाएंWaah waah waah kya baat hai
Thanku all :-)
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