अल्हड़पन पर कविता- Alhadpan poetry on freedom
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| BE YOU |
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खुले आस्मां के तले
धुन में अपनी मस्त रहे
आवारा बादल जैसे
धुन में अपनी मस्त रहे
आवारा बादल जैसे
जिधर चाहा उधर चल दिए
एक नौका पतवार बिना
एक नौका पतवार बिना
आप अपनी मंज़िल तय करे
मज़ा रहा इस जीने में
मज़ा रहा इस जीने में
जब नदिया खुद अपना मार्ग चुने
है खुद से मेरा अपना मिलन
मैं और मेरा अल्हड़पन
जिया है जिसे मैंने
मान के वरदान सजन ।
है यही ज़िन्दगी !
फूलों और काँटों से भरी
है खुद से मेरा अपना मिलन
मैं और मेरा अल्हड़पन
जिया है जिसे मैंने
मान के वरदान सजन ।
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| Alhadpan Hindi Kavita on freedom and self love by Vinita Mishra |


वाह क्या खूब सूरत दुनिया बसाया बहुत सुंदर,❤️🌹 दिल मे
जवाब देंहटाएंBy Ram Ram
बहुत सुंदर पंक्तियाँ👌👌👌
जवाब देंहटाएंसतीश।
🤩🤩🤩
जवाब देंहटाएंBeautiful Poem❤❤😊😊
जवाब देंहटाएंआस्मां के तले अपना मिलन हो
जवाब देंहटाएंअपनी मंज़िल तय करे l अपना मार्ग चुनने मज़ा रहे इसे जीने में
मेरा तेरा मिलन अल्हड़पन हो ll
Wow
जवाब देंहटाएंWhat a poem
:) :) Thanks
जवाब देंहटाएंBeautifullllll...............
जवाब देंहटाएंVery Nice MisVi 👏👏
जवाब देंहटाएंDilpreet
Wah kya baat hai..
जवाब देंहटाएंFrom Neelu