वृंदा - मेरी बछिया 2026 , Hindi Story
वृंदा मिली जब तीन महीने की थी,सफेद रंग और माथे पर श्वेत टिकउला , छोटा कद ओर हिरनी आँखे l इठला के चलती, लगती नखरिली जैसे हो महारानी घर की, लाल रंग की घंटी कंठ में टन टन करती I तीन दिन तक खडी रही डर से डोरी में बंधी रही बस आँखों से आँसू बहें शायद अपनी माँ को ढूँढ रही खिलाई रोटी हाथों से, चोकर और पशु आहार दिया, माथे में कुमकुम लगा के उसका घर में सत्कार किया धीरे धीरे हुई पुरानी अब करती है मनमानी सुबह और शाम की रोटी पहले वृंदा को भोग लगानी I है उसमें बच्चों की जान अपने घर की वही है शान नित्य नियम पाँव छूना उसके करते है जीना आसान आभास उसको हो जाता है जब कान खड़े हो जाते है, पड़ोसी के घर हुई चोरी तब वृंदा की घंटी सुन... चोर भी भाग जाते है I तीन साल की हुई है अब सुन्दर गईया लगती है एक बार जो देखे उसको दिल से तारीफ निकलती है पिछले माह खुल गई थी खूँटे से , ना जाने कहां निकल गई ...ढूँढ रहा था पूरा घर उसको फिर भी वृंदा नहीं मिली थक हार कर बैठ गए सोचा शायद खो गई वो पूछा गाँव के चरवाहों से लेकिन किसी को नहीं दिखी वो दिखलाई उसकी तस्वीरें एक बोला शायद दे...