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हमसफ़र # HAMSAFAR

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 हमसफ़र ***************************** ओस की बूंदों जैसे  पहले प्यार की खुशबू जैसे  इंद्रधनुष के रंगों जैसे  कोई दुआं क़ुबूल हो जैसे  ऐसी है तेरी मुस्कान   हमसफ़र मेरे ,  तू मेरा है अभिमान।। 

बचपन की राहें ( हिंदी कविता ) | Childhood Memories | Missing Childhood # बचपन की यादें # LIFE OF CHILDHOOD

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Pls  Listen Bachpan Ki Raahein   to experience  more realistic poetry  by single click on below  Image . बचपन की राहें *************************************************** कोई बता दे इस दिल को कैसे अब में सँभालू  फिर कैसे इसको कैद करूं फिर कैसे इसको मना लूं   कैसे पूरी करूं यह ख्वाहिश फिर से बचपन जी पाने की फिर से गुड्डी गुड्डू के संग रेत के महल बनाने की    फिर वापिस उन गलियों में जाके खो जाने की और दिन भर खेल खेल के वापिस थक के सो जाने की    बचपन की राहें पीछे छूटीं सब चेहरे अब अनजाने हैं  जो जाने पहचाने लगते थे अब बस वो अफ़साने हैं    फिर भी दिल को समझाती हूँ के समय हैं पीछे छूट गया  तू आज भी छोटा बच्चा है जब तेरा बचपन बीत गया  अब भूल जा सारी यादों को जो सिर्फ तुझे याद आती है  आ जिले अब इस पल को जिसमें जीवन बाकी है       

चाँद - रात का साथी | CHAND - RAAT KA SAATHI | Hindi Kavita

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Pls  Listen CHAND - Raat Kaa Saathii   to experience  more realistic poetry  by single click on below  Image . चाहू चाँद में तुझे चुरा लू .. दुनिया की नज़रों से  तुझको छुपा लू ! देदू इतना प्यार तुझे मैं  धरती और अम्बर की दूरी मिटा दू ! इतनी बातें तुझसे करलू ! रात का तुझको साथी चुन लू  ! साथ में तेरे मिलके   ऐ  चाँद  दुनिया की मैं  सैर करलू ! चाँदनी  को तेरी  अपना गहना बना लू ! शीतलता को अपने मन में बसा लू ! मान लू अपना   चाँद   🌛   तुझे मैं  और तुझको अपने माथे  🌙 पे सजा लू !! 

फिर कह दो .. | Fir Keh Doo | Sad Poetry On Love

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फिर कह दो एकबार फिर कह दो ... जो झूठ है , वही कह दो ... साथ छोड़ा है  तुमने ही ! पर दोष हमें दे दो !!  एकबार फिर कह दो ... रिश्ता क्या है ? कह दो ... तुमसे निभाया न गया ! साथ  हमने  छोड़ा .. कह दो !! एकबार फिर कह दो ... हम गलत है ! कह दो ... तुमसे जो की .. उम्मीद ! उसकी सज़ा दे दो !!         ******** Kindly watch Short video On FIR KEH DO 

पतंग | हिंदी कविता | PATANG | Poem on Kite

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पतंग ************************************************* बीती है जो तेरे संग  जीये  है बस वही पल  यादें है  उन्ही लम्हों की  जब थी पतंग डोर  के संग ! हर दिन एक नयी कहानी थी  आस्मां से ऊपर पतंग उड़ानी थी  थे आकाश में फैले हुए  बस  रंग प्यार के बिखरे हुए ! वो भी क्या रंगीन शाम थी  डोर हाथ में और पतंग तेरे नाम की  एक डर था मुझे  कहीं पतंग न कट जाये  डोर रहे  बस हाथ मेरे  और , तू आंखों से ओझल हो जाये  !