मृगतृष्णा * कविता - MRIGTRISHNA * HINDI POEM | Reality In LOVE and LIFE | Mirage

मृगतृष्णा हिंदी कविता - रेगिस्तान में sunset और मृगतृष्णा का एहसास, Vinita Mishra 


कभी यूँही ख्याल आया तेरा
सामने कोई न था
पर चेहरा नज़र आया तेरा

क्या बात है क्या यही प्यार है ?
तू नहीं फिर क्यों ?
तेरी मौजूदगी का एहसास है।

जानते है एक आवाज़ है
जो मेरे लिए खास है
और कुछ नहीं बस एक पुराना साज़ है

कहते है मोहब्बत अधूरी है !
क्या सच है ?
जो न मिले शायद उन्ही की पूरी है

क्यों हैरान है ? ज़िन्दगी एक प्यास है
यहाँ कुछ मृगतृष्णा नहीं
एक खूबसूरत रेगिस्तान है !

विनीता मिश्रा 
https://wwwthemisvi.com 












 

टिप्पणियाँ

  1. वाक़ई जो जीवन में एक ख्वाब अधूरा रह जाता है न वही तो जीवन के कुछ पलों को यादगार बना देता है नही तो जीवन बिल्कुल आपकी अंतिम पंक्ति की तरह "एक सूखा रेगिस्तान है"।

    जवाब देंहटाएं

  2. बस चेहरा नज़र आया तेरा
    बस यूँही ख्याल आया l
    बस मौजूदगी का एहसास है
    बस ज़िन्दगी एक प्यास है !l

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह वाह कितनी सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. ज़िन्दगी एक प्यास है ! lekin khoobsurat

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

Comments

Popular One's