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Vinita Mishra hindi poetess at TheMisVi.Com writing on Maa, Motivational, Stories
Value & Respect Yourself First
किसी को अपनी भी खबर न रहे
कोई ऐसे भी बेख़बर न रहे
लुटा के दिल की दौलत गैरों पे
हाथ अपने कभी खाली न रहे
मसरूफ इतना न रहे खिदमत में
के सर्दी, गर्मी बरसात
एक जैसे लगे
संवारते हर दम न रहे
भूल के खुदको
के आईना भी कहने लगे
अब देख लो मुझको
जिंदगी कहती है
कुछ होश है तुमको
बीत रही है जो
वापस ला सकते हो उसको ?
हर कदम एक शोर होता रहे
ना हो ऐसा के गुरूर टूटता रहे
ओझह ऐसी ना हो के दोस्त मेरे
कोई अपना, अपनी नजर से गिरता रहे
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