Short Poetry on भ्रम * # Doubt # Acceptations

  भ्रम   
 
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सोचा था संभाल लोगे तुम 

इल्म न था के मुड़के भी न देखोगे तुम 

कमबख्त , आज भी दिल को समझाते है हम 

जीवन है बड़ा कभी तो लौट के आओगे तुम।



 

टिप्पणियाँ

  1. लिखने को तो बहुत आतुर हूं पर डर भी ज्यादा गलता है। आप कि इतनी सुंदर रचना है,👌❤️✍️

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  2. बहुत बढ़िया।
    उम्मीदें जीवन मे हमेशा रहती है।

    सतीश।

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