बेक़रार हिंदी कविता * BEKARAR - HINDI KAVITA

 

     
   
** बेक़रार **

हो गया है प्यार अब 

दलीले देना बेकार है ,

कोई सूरत नज़र आती नहीं 

आईना देखना बेकार है। 


है आंखों से नीद गयी

सपने देखना बेकार है ,

सब मुझको फरेब लगे 

अब होश में आना बेकार है । 


आदत है अब बिगड़ गयी 

शिकायत करना बेकार है ,

तेरे बिन मेरा जीना 

लगता मुझको दुश्वार है । । 

                    By Vinita 


टिप्पणियाँ

  1. Achi kavita hai ......apko ek blogspot banana chahiye.......I really loved it.

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  2. आप बहुत ही सुंदर कविता लिखी है आप हम सबकी गौरव हैं आप हम सबकी अभिमान हैं,👌✍️ राम राम
    रविंद पाण्डेय

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