रखूं कहाँ ये सोचता हूं तेरी वफ़ा के फूल - दिल को छू जाने वाली शायरी
दिल के कुछ एहसास होते है जो शब्दों में ब्यान करना असान नहीं होता आज कुछ ऐसी ही पंक्तियाँ लिखी है
लगती नहीं कोई जगह मुनासिफ महफूज।
सवालों के बीच है रिश्तों की नोकझोंक,
क्या कहें जोड़ सकते नहीं टूटी हुई डोर।
सजा के रखा है खयालों में आशियान अपना,
देखा है तेरे साथ पूरा होता सपना।
बांध रखे हैं मन्नतों के धागे कुछ इस तरह,
तारों के बीच चमकता रहे चाँद जिस तरह।
ना उम्मीदों में भी उम्मीदें लिए हुए,
चल रहे हैं धीमी चाल इंतजार करते हुए।
मुड़ मुड़ के देखते हैं बीते हुए पल,
काश और जी लेते कुछ पल तो तेरे संग।
तेरी खुशबू से महका है आज भी ये मन
तू नहीं तो लगता है सूना सा चमन
विनीता मिश्रा
TheMisVi.com

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Comments