रखूं कहाँ ये सोचता हूं तेरी वफ़ा के फूल - दिल को छू जाने वाली शायरी

Teri wafa ke phool shayari Vinita Mishra
 Misvi Poetry 

नमस्कार मैं विनीता 
दिल के कुछ एहसास होते है जो शब्दों में ब्यान करना असान नहीं होता आज कुछ ऐसी ही पंक्तियाँ लिखी है 

रखूं कहां ये सोचता हूं तेरी वफा के फूल,
लगती नहीं कोई जगह मुनासिफ महफूज।
सवालों के बीच है रिश्तों की नोकझोंक,
क्या कहें जोड़ सकते नहीं टूटी हुई डोर।

सजा के रखा है खयालों में आशियान अपना,
देखा है तेरे साथ पूरा होता सपना।
बांध रखे हैं मन्नतों के धागे कुछ इस तरह,
तारों के बीच चमकता रहे चाँद जिस तरह।

ना उम्मीदों में भी उम्मीदें लिए हुए,
चल रहे हैं धीमी चाल इंतजार करते हुए।
मुड़ मुड़ के देखते हैं बीते हुए पल,
काश और जी लेते कुछ पल तो तेरे संग।

तेरी खुशबू से महका है आज भी ये मन 
तू नहीं तो लगता है सूना सा चमन 

विनीता मिश्रा 
TheMisVi.com





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