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मोह्हबत है
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दस्तक देती एक आहट है। क्या अब भी हमें मोह्हबत है ? दिल कहता है तुझसे मिल आउ ! क्या तेरी भी यही चाहत है तेरा साथ बहुत भाया है मुझे काफी समय साथ बिताया हमने ये अंदाज़ा मेरा गलत होगा के - तू भूल गया है मुझे अब आहट पे यकीं हो चला कोई है जो मुझसे कह रहा क्या अब भी तू मेरे साथ है हाँ ! कह दिया मैंने तेरी परछाई की आदत है है फिर महसूस किया , हर रूप में तेरा रूप दिखा हाँ मुझको यकीं ये हो गया के मुझको तुझसे मोहब्बत है
नमस्कार दोस्तो ! आज की कविता मैंने ट्यूबरक्लोसिस (टीबी ) बीमारी पे लिखी है, जैसा की हम सब जानते है कि ये एक खतरनाक बीमारी है ।
इसमें अगर मरीज़ को उपचार न मिले तो उसकी जान भी जा सकती है। मैंने टी.बी बीमारी को कविता के रूप में पेश किया है जिससे की आपको इसे समझने में आसानी हो। मेरा आप सभी से निवेदन है की आप सब अपना ध्यान रखे और इस बीमारी को अपने देश में जड़ से ख़तम करने में जागरूकता फैलाये , और अगर किसी को टी.बी हो जाये तो वो डरे नहीं क्यूंकि ये रोग लाइलाज नहीं है आप अपना इलाज तुरंत शुरू कराये और डॉक्टर के संपर्क में रहे।
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ऐतबार मुझे हो रहा
एक अजीब सी बात है के चाँद भी तेरे साथ है है तारे भी कुछ कह रहे और मेरा मन भटका रहे है प्यार मुझको हो रहा दिल बार बार कह रहा अब न गिला कोई रहा है ऐतबार मुझको हो रहा न झूठ है कहना मेरा
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*** मगन धुन ***
चल तेरे साथ चलें। थोड़ा करके श्रृंगार चले , फिर अपना आँचल लहरा के चले। माथे पे बिंदिया सजाके चले , चल तेरे साथ चले।।
फिर सबकुछ हम भूला के चले , सारे ज़ख्मो को अपने छुपा के चले। मुँह में पान दबा के चले , फिर तुझको थोड़ा रिझा के चले। चल तेरे साथ चले।।
अपनी पूरी मस्ती में चले , आंखों में तुझको छुपा के चले। फिर दिल अपना हम लुटा के चले , तुझ को तुझसे ही चुरा के चले। चल तेरे साथ चले।। तोड़ते सारे दायरों को चले , अपना हम तुझको बना के चले । आसमा को कदमो में लाके चले , चल तेरे साथ चले ।।
करलू पूरी अपनी मनमानी , छोड़ू पीछे दुनियादारी । फिर अपनी मगन धुन में चले ,